Saturday, August 30, 2008

कुछ मेरी भी सुनो...


तूफा से खौफ कैसा "सागर" मुझको ,

जब खुद,खुदा ही नाखुदा,कश्ती का मेरी बनगया...........

Friday, August 29, 2008

बिटिया ना कीजो
जब तुम्हारे कोख में आई थी माँ मैं ,
कोई नहीं जानता था की क्या है ?,
सभी चाहते थे एक बेटा हो,
पर तुम क्या कर सकती थी माँ ,
मुझे जन्म देना पड़ा ......और शुरू हो गई मेरी लाचारी ....
कभी बहन बनकर ,
कभी बेटी बनकर,
सभी मुझे सताते रहे ,
बड़ी हुई तो कर दिया बिदा,रोती रही ,विलखती रही ,
किसीने नही सुनी मेरी एक ..बस कर दिया विवाह ..
आगई बहु बन सशुराल अपनी ,कभी सास तो ,कभी नन्द , तडपाती रही ...दहेज़ के लिए....
करता रहा हरण जिस्म का पति बनकर,
देता रहा ताने ससुर भी,
पल-पल पीती रही विष ,मान सुधा का खुट मैं ,
करती रही खून हाथ अपने ,
अपने ही अरमानो का ,
पर अब किये जो दाता मेरे ,ऐसा ना कीजो ,
अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो !!!!!!!!!!
aj jab kuch likhne baitha to samajh nahi aa raha kya likhu, bus yuhi kuch apni aur kuch dunia hi hakikat hi jise maine savddo me piro diya hai..